चंद्रशेखर आजाद भारत के महान स्वतंत्रता सेनानी और प्रमुख क्रांतिकारी थे। उनका संपूर्ण परिचय नीचे दिया गया है:

मूल विवरण

  • मूल नाम: चंद्रशेखर तिवारी
  • जन्म तिथि: 23 जुलाई 1906
  • जन्म स्थान: भाबरा गांव, अलीराजपुर जिला (वर्तमान मध्य प्रदेश)
  • पिता का नाम: पंडित सीताराम तिवारी
  • माता का नाम: जगrani देवी
  • मृत्यु तिथि: 27 फरवरी 1931
  • मृत्यु स्थान: अल्फ्रेड पार्क (वर्तमान चंद्रशेखर आजाद पार्क), प्रयागराज, उत्तर प्रदेश
  • उम्र: 24 वर्ष [1, 2, 3, 4, 5, 6]

‘आजाद’ नाम मिलने की कहानी

  • दिसंबर 1921 में मात्र 15 साल की उम्र में उन्होंने महात्मा गांधी के असहयोग आंदोलन में भाग लिया।
  • गिरफ्तारी के बाद जब मजिस्ट्रेट ने उनसे नाम पूछा, तो उन्होंने अपना नाम ‘आजाद’, पिता का नाम ‘स्वतंत्रता’ और पता ‘जेल की कोठरी’ बताया।
  • इस निडरता के कारण उन्हें 15 कोड़ों की सजा दी गई, और तभी से वे ‘चंद्रशेखर आजाद’ के नाम से प्रसिद्ध हो गए। [1, 2, 3]

क्रांतिकारी जीवन और संगठन

  • HRA और HSRA: वे पंडित राम प्रसाद बिस्मिल के संपर्क में आकर हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन (HRA) से जुड़े। बाद में उन्होंने भगत सिंह के साथ मिलकर इसका पुनर्गठन किया और इसका नाम हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन (HSRA) रखा तथा इसके मुख्य सेनापति बने। [1, 2, 3, 4]
  • प्रमुख घटनाएं:
    • काकोरी ट्रेन एक्शन (9 अगस्त 1925): सरकारी खजाने को लूटने की ऐतिहासिक घटना में मुख्य भूमिका निभाई।
    • सांडर्स वध (17 दिसंबर 1928): लाला लाजपत राय की मौत का बदला लेने के लिए भगत सिंह और राजगुरु के साथ मिलकर लाहौर में ब्रिटिश पुलिस अधिकारी जॉन सांडर्स को मार गिराया।
    • केंद्रीय विधानसभा बम कांड (8 अप्रैल 1929): भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त द्वारा असेंबली में बम फेंकने की योजना में अहम रणनीतिक भूमिका निभाई। [1, 2, 3]

बलिदान

  • 27 फरवरी 1931 को प्रयागराज (इलाहाबाद) के अल्फ्रेड पार्क में अंग्रेजों से घिर जाने के बाद, उन्होंने संकल्प लिया था कि वे कभी जीवित अंग्रेजों के हाथ नहीं आएंगे।
  • अंतिम गोली बचने पर उन्होंने खुद को गोली मारकर देश के लिए सर्वोच्च बलिदान दे दिया। [1, 2, 3]

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